मंगलवार, 12 सितंबर 2017

बिपाशा बसु- जिंदगी का खूबसूरत सफर

स्वास्थ्यवर्धक खाना और व्यायाम जिंदगी को खूबसूरत बनाने का मूलमंत्र है। यही वह रहस्य है जिससे जिंदगी को खूबसूरत बनाया जा सकता है। मैं खूब पानी पीतीहूं। घर पर तैयार की गई रेसिपी ही मेरी चमकती त्वचा का राज है। जो लुक मुझे सबसे ज्यादा पसंद है वह है सेक्सी स्मोकी आंखें और बिना लिपिस्टक लगे होंठ।अरे हां मेरे बाल मेरी सुंदरता के सबसे बड़े राजदार हैं। और इसके लिए मैं हमेशा अच्छे कंडीशनर का प्रयोग करती हूं।ताकि मेरे बॉल सुंदर और स्वस्थ रह सकें। मैं हमेशा आइल;मसाज करवाती हूं ताकि मेरे बाल चमकदार बने रहें। मेरे बाल प्राकृतिक रूप से काले और घने हैं फिर भी मैं कलर का प्रयोगकरती हूं। कलर से मैं अपने बालों का हायलाइट करती हूं।
मेरी चाहत है कि मैं हमेशा सुंदर दिखूं, मेरी त्वचा चमकती रहे इसके लिए मैं हमेशा क्लीजिंग, टोनिंग और माश्चराइजिंग पर यकीन करती हूं। सोने से पहले मैं इनका प्रयोग करती हूं। मैं बिना सनस्क्रीन लगाए घर से बाहर नहींनिकलती। हैवी मेकअप करने से मैं हमेशा बचती हूं। जहां तक बात आंखों की है मैं आइलाइनर हमेशा लगाती हूं। मुझको एम.ए.सी के प्रोडक्ट पसंद हैं। लिक्वड आई लाइनर, लिपग्लास मेरी पहली पसंद हैंखासकर उसके कोरल और पिंक शेड्स। जैसा कि मैंने पहलेकहा स्वास्थयवर्धक खाना और व्यायाम जिंदगी को खूबसूरत बनाने कामूलमंत्र है। इसीलिए मैं हर चीज खाती हूं सिवाय रेडमीट और चावल के।हरी सब्जियां, चिकन, दाल रोटी मेरा नियमित आहार है। चमकदार त्वचा केलिए मैं नट्स, सीड्स, स्प्राउट, योगर्ट और फ्रूट्स लेती हूं। फिश और नट्स में ओमेगा 3 फेटी एसिड होता है जिससे त्वचा चमकदारबनी रहती है

सोमवार, 7 अगस्त 2017

बच्चों की पढ़ाई में संगीत नदारद क्यूं


 डा. अनुजा भट्ट
 क्या आप किसी आठवीं क्लास में पढऩे वाले विद्यार्थी से ये उम्मीद कर सकते हैं कि वह तबला वादन में अपनी प्रस्तुति से सबको चौंका दे। क्या छठी क्लास में पढऩे वाला बच्चा रवि वर्मा या अमृता शेरगिल की पेंटिंग में अंतर कर सकता है? क्या ये बच्चे कत्थक और भरतनाट्यम जैसे नृत्य के भेद को बता सकते हैं? इसकी वजह यह है कि बच्चे गणित ,विज्ञान, भूगोल  इतिहास, कंप्यूटर जैसे विषयों  में ही हर समय घिरे रहते हैं। स्कूली शिक्षा में फाइन आर्ट का विशेष महत्व नहीं है। शाीय गायिका शुभा मुद्लग इस विषय को बहुत गंभीरता से उठाती है कि आखिर क्यों कला के प्रति स्कूल बहुत गंभीरता से नहीं लेते और उसको पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करते।  वह सिके प्रति गंभीर क्यों नहीं है?  यह विचार एकदम सरल है। बच्चों को नर्सरी क्लास से ही कला की शिक्षा दी जाए  अन्य विषयों की तरह कला का भी मूल्यांकन किया जाए।  इस विषय को जबरदस्ती उन पर थोपा न जाए बल्कि उनकी रुचि विषय पर केंद्रित किया जाए। यह  भी उतने ही महत्व से पढ़ाया जाए जितना गणित और विज्ञान विषय पढ़ाए जाते हैं।   कला के अंतर्गत संगीत, नृत्य, पेंटिंग, रंगमंच, वाद्य यंत्र शामिल हो।  इस अध्य्यन के बाद हमारे सामने अच्छे कलाकार होगें।
 अभी तक कला की शिक्षा लेने वाले बच्च व्यक्गित स्तर पर ही सीखते हैं । फिर चाहे वह  नृत्य हो संगीत हो या फिर वाद्य यंत्र।  उनसे पूछने पर वह अपने स्कूल टीचर का नाम नहीं लेते यह आश्चर्य की बात है कि उनके आर्ट टीचर के रीप में स्कूल के आर्ट टीतर का नाम नहीं है। अधिकांश माता- पिता को भी कला की  विधिवत शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं है।  जबकि भारत में कला की परंपरागत शिक्षा का महत्व है लेकिन जबचक बच्चे खुद को एक कलाकार के रूप में नहीं देखना चाहेंगे तब तक वह गुरू परंपरा के बारे में जानने को क्यों उत्सुक होंगे? कला की कक्षा में बारी बारी से हर कला की हर विधा के शिक्षक को पढाने का अवसर मिले। फिर ताहे वह संगीत हो, कला हो रंगमंच हो या  कुछ और? शिक्षकों को प्रशिक्षण देते समय भी यह घ्यान में रखा जाए और कला शिक्षकों को भी प्रशिक्षण के लिए भेजा जबच्चों की पढ़ाई में संगीत नदारद क्यूं

रविवार, 4 जून 2017

मां से दिया कला का संस्कार- तनुश्री वर्मा

mainaparajita@gmail.com
तनुश्री वर्मा पेशे से साफ्टवेयर   इंजीनियर हैं लेकिन उनको पेंटिंग और क्ले मॉडलिंग से गहरा लगाव है। वह ग्लास पेंटिंग और ऑयल पेंटिंग दोनो बहुत खूबसूरती के साथ करती हैं जानते हैं  अपने बारे में क्या कहती हैं तनुश्री-- मैं सृजनात्मक वातावरण में बड़ी हुई। मैं जब बच्ची थी तो मां को क्राफ्ट की शिक्षा देते हुए देखा। वह चूडिय़ां को रखने के लिएबॉक्स बनाना सिखाती या फिर आडियो टेप रखने के लिए बॉक्स बनवाती। इसीतरह फोटोफ्रेम लैंपशेड्स बनाना सिखाती। यह सारी चीजें ऐसी चीजों सेबनाई जाती जो बहुत साधारण सी होती मसलन आइसक्रीम की डंडिया। मेरे पिता एक अच्छे कलाकार हैं। वह भी अपनी हॉबी को पूरा करने के लिए पेंटिंग करते। इस तरह अपने आप ही मैंने पेंटिंग, स्केचिंग और क्ले मॉडलिंग सीखा। मैंने इन तीन अलग अलग विधाओं में कला का स्वाद चखा लेकिन इनतीनों को पेटिंग में उपयोग कर पाना संभव नहीं है। मैं जब गिफ्ट शॉपमें जाती तो वहां कई छोटी छोटी कलात्मक चीजें देखती जो बहुत मंहगी होती। मैंने सोचा क्यों  मैं खुद इनको बनाऊं। और इस तरह मैंनेकलाकृतियां बनाना शुरू किया। जब मैंने बनाना शुरू किया तो मैंने कोईक्लास नहीं कि हां किताबें पढ़ी। मैं इसकी टेक्नीक से परिचित नहीं थी।इसको बनाने वाले औजार कहां मिलते हैं यह भी पता नहीं था। मैंने इसकेबारे में जानने केे लिए इंटरनेट का भी सहारा लिया। पिछले 8 साल से मैं इस काम को कर रही हूं। व्यस्त समय में क्ले के साथ कलाकृतियां बनानामुझे सुखद अनुभूति देता है। यह मुझे तनाव से मुक्त करता है औरआत्मसंतोष देता है। एक साफ्टवेयर इंजीनियर के सप्ताहांत एक कलाकार के रूप में बदल जाते हैं। मेरी बनाई कलाकृतियां मेरे घर में सजी हुईहैं।
  
   

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